उत्तराखण्ड,
रिपोर्ट मदन कोशवाल ब्यूरो चीप
अनु0 जाति/जनजाति/पिछड़ी जाति वैचारिक महा सभा -देहरादून के प्रान्तीय अध्यक्ष श्री दिलीप चन्द्र की ओर से,महामहिम राष्ट्रपति,भारत सरकार,महामहिम राज्यपाल,मा0 मुख्य मंत्री एवं मुख्य सचिव उत्तराखण्ड को माननीय सांसद हरिद्वार श्री त्रिवेन्द्रम सिंह रावत जी द्दारा दिये गये उनके वक्तव्य, आई ए एस(I AS)अधिकारीयों पर दिये गये आपत्तिजनक बयान पर संगठन की आपत्ति प्रकट करते हुए उत्तराखण्ड की जनता से माफी मांगे हुए अपना बयान वापस लेने की मांग करता है ।
महोदय, मा0 सांसद ने लोक सभा में उत्तराखण्ड में बह रही गंगा व उसकी सहायक नदियों में अवैध खनन का मुद्दा उठाया है ,तो उसकी विधिवत जांच हेतू ब्यवस्था है । लेकिन मीडिया से उत्तराखण्ड के खनन सचिव के सन्दर्भ में यह बयान देना अत्यधिक आपत्तिजनक है कि ** शेर कुत्तों का शिकार नहीं करता है**।संगठन इस बयान को जातिगत दुर्भावना से भी देख रही है । इस बयान से प्रशासन को चलाने वाले I.A.S./I.P.S.व P. C.S. एवं अन्य अधिकारीयों के सम्मान को ठेस पहूँची है । तथा कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पढ़ा है । यह बयान समान नागरिक संहिता का उल्लंघन है ।
मान्यवर, हमारा संगठन महामहिम राष्ट्रपति महोदया, महामहिम राज्यपाल महोदय,मा0मुख्यमंत्री महोदय,तथा श्रीमान मुख्य सचिव महोदय, से आग्रह करता है कि "जनसेवकों" एवं लोक सेवकों के दायरे में आने वाले जनप्रतिनिधियों को आदर्श आचार संहिता का पालन करने हेतू " जनप्रतिनिधि आदर्श आचार संहिता" बनाई जानी चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ इस प्रकार का दृश्य भी वायरल होते हुए देखा जाता है, कि जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के कार्यालय में जाकर अपने समर्थकों के साथ अधिकारी को गाली-गलोच व बेइज्जती करके आ जाते हैं । जबकी नियमों का पालन न करने वाले अधिकारीयों कर्मचारियों के लिए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों ने प्रशासनिक कार्यवाही(Adminisst- rative Action) के नियम बनाये हुए हैं । लेकिन अधिकारीयों/कर्मचारियों से अभद्रता करना,आपत्तिजनक बयानबाजी करना स्वीकार्य नहीं है ।
अंतः महामहिम एवं माननीय महोदयों से संगठन अनुरोध करता है कि उपरोक्त अनुरोध पर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा कीजियेगा ।
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